Showing posts with label Hindi. Show all posts
Showing posts with label Hindi. Show all posts

Thursday, 15 December 2011

फ़ोन-सेक्स

,
यह कहानी मेरे अनुभव और भावनाओं को व्यक्त करती है। मैं शशांक, उम्र 25 वर्ष, कद 5'11", दिल्ली का रहने वाला हूँ।
मेरे मन में हमेशा सेक्स करने की इच्छा रहती है सबकी तरह, पर मैं रोज उसमें कुछ नया और अच्छा करने की कोशिश करता रहता हूँ।
मैं देखने में पता नहीं कैसा लगता हूँ पर हाँ, लड़कियाँ हमेशा मुझे पर नजर गड़ाए रहती हैं। मुझे अब तक यही सुनने को मिला है कि मैं सबसे सेक्सी लड़का हूँ।
यह कहानी मेरी गर्लफ्रेंड की है जिसकी अब किसी और से शादी हो चुकी है, उसी ने मुझसे प्रथम प्रणय-निवेदन किया था। तब वो 22 साल की और मैं 23 का था।
और मैंने हाँ बोल दिया था क्योंकि मेरे मन में भी उसके लिए भावनाएँ थी पर ग़लत नहीं। वो देखने में बहुत ही सुंदर है, कद 5'5", रंग गोरा चेहरा परी की तरह और तनाकृति 32-28-32
वो मुझ पर जान देती थी। मैं उससे फोन पर घंटों बात करता पर मिलना कम ही हो पाता था। हम दोनो अपने अपने परिवारों के कारण बस दूर से ही एक दूसरे को देख पाते थे पर एक दूसरे से ना मिल पाने के कारण हम दोनों के मन में आकर्षण बढ़ता जा रहा था।
और एक दिन उसने व्रत रखा करवा चौथ का।
शाम को फोन पर बोली- मैं व्रत कैसे खोलूँ?
मैंने कहा- तुम्हारे पास मेरा फोटो है, उसे देख कर !
वो बोली- वो तो कर लूँगी पर पानी कैसे पिलओगे?
मैंने कहा- तुम फोन करना मैं कुछ करूँगा।
उसने शाम को फोन किया और मैंने दिन भर सोचा था पर मुझे कुछ समझ नहीं आया था।
तब तक उसका फोन आ गया- वो फोटो मैंने देख लिया है ! अब मुझे पानी कैसे पिलाओगे?
मैंने फिर सोचा, अचानक मेरे दिमाग़ की बत्ती जली और मुझे एक आइडिया आया, मैंने कहा- तुम्हारा मुँह ही तो जूठा करना है आज ! मैं तुम्हें चूम लेता हूँ ! तुम अपना व्रत खोल लो।
वो शरमा गई और कुछ नहीं बोली।
और हमने फोन पर ही अपना पहला चुम्बन किया। उसके बाद पता नहीं मुझे और उसे क्या हो गया कि हम दोनों एक दूसरे के लिए तड़पने लगे।
एक दिन आख़िर हमें मौका मिला और हम मिले और सिर्फ़ एक दूसरे का हाथ पकड़ कर एक दूसरे की आँखों में देखते रहे। तब उसकी मम्मी आने वाली थी, सो वो चली गई।
फिर फोन पर हमारी बात हुई, उसने पूछा- आपने मुझे बाहों में क्यों नहीं लिया?
मैंने कहा- तुम्हारी मम्मी आने वाली थी ना ! तो मुझे तुम्हें जल्दी ही छोड़ना पड़ता। मैं तुम्हें हमेशा अपने से चिपकाए हुए रखना चाहता हूँ।
वो शरमा गई। फिर हम दोनो इसी तरह बातें करते रहे और बातों में ही बहुत खुल गये। वो अपनी निजी बातें भी मुझसे करने लगी।
एक दिन वो बहुत गर्म हो रही थी और मेरे से मिलकर सेक्स करने की इच्छा (शादी के बाद) जता रही थी पर साथ में अफ़सोस भी कि हम अभी नहीं मिल सकते।
उसी वक़्त मैंने उससे उसके बदन का नाप पूछा और चुचूकों का रंग भी।
उसने कहा- आप खुद ही देख लेना..
अचानक हम दोनों को पता नहीं क्या हुआ, हमने बातों में ही फोन सेक्स शुरु कर दिया।
जो इस प्रकार था...
शशांक : मैं तुम्हें हग करना चाहता हूँ.....
वो : करो ना.... पूछो मत...... मैं आपकी ही हूँ।
शशांक : मेरी आँखो में देखो....महसूस करो...
वो : देख रही हूँ....
शशांक : मैं तुम्हारे होठों को देख रहा हूँ...
वो : हाँ...
शशांक : मैं तुम्हें कंधों से पकड़ रखा है। अब मैं तुम्हारे बाल चेहरे से हटा रहा हूँ और धीरे से अपने होंठ तुम्हारे होंठों की तरफ ला रहा हूँ, फील इट, युअर आइज हस बिन क्लोस्ड...न माई लिप्स आर गोयिंग टू मीट विद यूअर लिप्स...
वो : ह्म्‍म्ममममम करो ना प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़
शशांक : बॅट मैंने किस नहीं किया...
वो : करो नाआआआअ...
शशांक : मैंने सिर्फ़ अपनी जीभ को बाहर निकाल कर उसकी टिप से तुम्हारे होंठो को छुआ। लिक कर रहा हूँ....
वो : उमौमौममौमौमा....... आइयी कॅन फील यू शशंकककक
शशांक : अब मेरे हाथ तुम्हें हग कर चुके हैं ! मैं तुम्हारी कमर पर टॉप के ऊपर सहला रहा हूँ...फील कर रही हो नाआआ माइ लाइफ माइ जान..........
वो : हाँ....
शशांक : अब तुमने अपने हाथ से मेरी शर्ट को जींस से निकाल कर मेरी कमर पर सहलाना शुरु कर दिया है।
वो : और मैँने तुम्हे ज़ोर से हग कर लिया है और स्मूच कर रही हूँ ! मैं मर जाऊँगी शशाआआआन्क्क्क्क !
शशांक : ऐसे नहीं मरने देंगे अपनी जान को ! हम साथ में मरेंगे... मैंने धीरे से तुम्हारी आइज पर किस किया और तुम ने अपनी आँखें खोली और अब शरमा रही हो
वो : मुझे कुछ हो रहा है...
शशांक : अब मैंने तुम्हारे लिप्स पर एक छोटा सा किस किया और अपने हाथ से तुम्हारी गर्दन पर से बाल पीछे कर दिए कान के ऊपर से और अपने लिप्स तुम्हारे गले पर रख दिए
वो : मेरे रोए खड़े हो रहे हैं ! मैं मर जाऊँगी.. प्लज़्ज़्ज मेरे पास आ जाओ नाआआ....
शशांक : मैं वहीं हूँ तुम्हारे पास......अब मैंने तुम्हारे पीछे जा कर हग कर लिया है...और अब मैं तुम्हारे कान की लटकन को चूस रहा हूँ....
वो : उम्म्ममम शाआ शाआअंकक
शशांक : मेरा हाथ तुम्हारे दिल के पास हैं मैं तुम्हारी गरदन और कान को चाट रहा हूँ ! मेरा दूसरा हाथ तुम्हारी नाभि के पास है.... और मैं टॉप को थोड़ा सा ऊपर कर पेट पर हाथ फ़िरा रहा हूँ ! अब धीरे धीरे ऊपर करके बूब्स को अपने हाथों से ढक लिया है ! होंठों से गले को लगातार किस कर रहा हूँ....
वो : मुझे तुम्हारे कपड़े तो निकालने दो ! तुमने मेरा टॉप तो निकाल दिया है......
शशांक : हाँ निकालो ना प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़
फिर उसने बातों से मेरे कपड़े निकाल दिए
फिर मैंनें आगे कहा- और अब मेरे तुम्हारे बीच सिर्फ़ ब्रा है, मैंनें पीछे से हग किया हुआ है और तुम्हारी कमर को चाट रहा हूँ ! पर यह ब्रा की हुक स्ट्रीप बीच में आ रही है...
वो : उसे निकाल दो ना प्लज़्ज़्ज़
शशांक : मेरे हाथ तुम्हारे कंधे पर हैं ! मैं पीछे और मैंने धीरे से हाथ बूब्स की ओर बढ़ाने शुरु कर दिए हैं और वक्ष की उंचाइयों पर अपने हाथ ले जा रहा हूँ....
वो : ह्म्‍ममम उम्म्म्म
शशांक : मैं तुम्हारे दिल की धड़कन को फील कर सकता हूँ ! अब मैं सामने आकर तुम्हारे कंधे को चूम रहा हूँ ! पर यह ब्रा की स्ट्रीप बीच मे आ रही है.... मैंने दातों के बीच इसे फंसा कर कंधे से नीचे उतार दिया पर सिर्फ़ एक तरफ़ का... फिर अपने लिप्स को तुम्हारे बूब्स के ऊपर ला रहा हूँ लिक करते हुए
वो : उफ्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह
शशांक : मैंने बूब निकाल लिया है दूसरे को ब्रा के अंदर ही हाथ से पकड़ लिया है अब जीभ से तुम्हारे चुचूक को खोज रहा हूँ, उधर उंगली से....
वो : देखो... ये रहे..... जानुउउउउउ.....
शशांक : अहहह मिल गये निप्पल......मैंने सिर्फ़ ज़ीभ की टिप से निपल को छुआ है।
वो : ये कड़ा हो रहा है..............ह्म्‍म्म्ममममम उम्म्म्मम जन्नन टच इट विद योर फिंगर प्लज़्ज़्ज़्ज़
शशांक : फिर मैंने झीभ से ही उसे ऊपर मोड़ दिया, फिर नीचे..... फिर लेफ्ट और फिर राइट.... और फिर गोल गोल घुमा रहा हूँ .... अब मैंने इसे चूसना शुरु कर दिया....
वो : लिक इट बेबी.... उम्म्म्मम
मैं चूसता जा रहा था और वो मस्त हुई जा रही थी !
शशांक : अब मैंने पीछे से ब्रा की स्ट्रीप खोल दी और दूसरे बूब को भी मुँह में भर लिया है....
वो : दबाओ दूसरे को... उम्म्म्म इसको भी चूस लो...
काफ़ी देर हम ऐसे ही मज़ा लेते रहे, मुझे उसकी वासना भरी आवाज़ मस्त कर रही थी तो उसे उसे मेरी किस और लिक करने की आवाज़ गरम कर रही थी....
कुछ देर बाद उस ने मुझे कहा....फक मी शशांकककक अब नहीं रुका जा रहा..... फक मी वेरी हार्ड......
शशांक : (पर मैं तो और भी कुछ करना चाह रहा था) रूको मेरी जान...... अभी तो बहुत कुछ करना है.......
अब मैंने टोपलेस तुम्हें हग कर लिया है और तुम्हारे निपल्स मेरे चेस्ट पर निपल्स से रब हो रहे हैं...... और रब करो.....
वो : उम्म्म्मम ह्म्‍म्म्ममम ऊएईईईईईमाआआअ शशांकककक यू आर सो सेक्सीईई फक मी प्लज़्ज़ज़्ज़
शशांक : वेट...... जान, आज मैं तुम्हें जन्नत की सैर करा रहा हूँ... अब मैं नीचे जा रहा हूँ और नाभि को लिक कर रहा हूँ... अब और नीचे... मैंने लोअर को लिप्स से पकड़ कर पूरा उतार दिया है...
वो : निकाल दो .... पेंटी भी निकल दो... उम्म्म
शशांक : अब मैं तुम्हारे पैर क अंगूठे को चूस रहा हूँ और लिक करते हुए ऊपर आ रहा हूँ..... अब मेरे लिप्स तुम्हारी जाँघो पर हैं... बहुत सुंदर हो तुम मेरी जान... मुझे आज इस पूरी सुंदरता को भोगने दो..
वो : उम्म्म्मम ह्म्‍म्म्ममम ऊएईई मैं तिईईई हूँ..... जो चाहे कर लो ! मुझे इतना सुख कभी नहीं मिला....(उसकी आवाज़ मे वासना घुली थी)
शशांक : अब मैं जन्नत की खुशबू ले रहा हूँ, कौन से रंग की पेंटी पहनी है?
वो : पिंक....
शशांक : बहुत सुंदर है.. अब मैंने लिप्स से पकड़ कर पेंटी नीचे कर दी....
वो : पूरी निकाल दो ना आआ...
शशांक : पूरी निकाल दी... अब मैं ज़ीभ की टिप से तुम्हारी चूत को सहला रहा हूँ, और लिप्स को ज़ीभ से खोलने की कोशिश कर रहा हूँ...... कैसा लग रहा है.... जान....?
वो : उईईई मममम्ममी..... बहुत्त्त्त मस्त लग रहाआआ हैईईइ... करते रहो...
शशांक : (थोड़ी देर बाद.......) जान क्या रेडी हो ? अब डाल दूं?
वो : पूछो मत अब फाड़ दो इसे पर धीरे से करना शुरू में... फकक्क्क मीईईईई प्लज़्ज़्ज़
शशांक : लो जान अब ले लो........ ये देखो कितना तड़प रहा है अंदर जाने को.....
वो : डाल दो नाआआआ अब प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़
शशांक : लो... ये लो....
वो : ह्म्‍म्म्मममम ऊएईईईईईई मममयययी
शशांक : अहहह धप्प.......लो जनंननन्
वो : फक्क मीईई जानुउ हार्ड वेरी हार्ड
इस तरह हम तीस मिनट तक लगे रहे वो सीत्कार करती रही।
वो कह रही थी मुझे आज मम्मी बना दो और मैं कह रहा था कि मेरी आज तुम बनोगी हमारे बच्चों की मम्मी....
फिर वो बोली क़ि जो चरम सुख मैंने उसे दिया वो उसे कभी नहीं भूलेंगी और मुझसे मिलने के लिए कहने लगी और बोली- प्लीज़ मुझ ही शादी करना ! मैं तुम्हारा दिया सुख रोज पाना चाहती हूँ...
इस तरह हम आगे बढ़ते रहे।
और एक दिन मेरे घर पर कोई नहीं था, मैंने उसे घर बुला लिया और उसे जम कर चोदा ! वो तो मुझ पर निहाल हो गई। मैंने उस दिन आइस क्यूब और शहद भी प्रयोग किया। उसे उस दिन चरम सुख की प्राप्ति हो गई और मुझे भी...
उसने मुझे कैसे गर्म किया और कैसे मेरा साथ दिया, उसके ही शब्दों में अगली कहानी में...
तब तक आपकी मेल का इंतज़ार रहेगा।

बिल्लू से चुदवा दो ना

,
मेरा नाम रणदीप है, शादी को सिर्फ दो साल हुए हैं। मेरी पत्नी माधुरी बेहद खूबसूरत और सेक्सी है।
चूंकि मैंने लव-मैरिज की थी तो हम दोनों घर वालों से अलग अकेले रहते हैं। मैं एक प्राइवेट कम्पनी में सेल का काम करता हूँ।
हम दोनों बहुत खुश हैं अपनी जिंदगी से। मेरी पत्नी और मुझ में सेक्स की भूख कूट-कूट कर भरी है और सेक्स करते समय हम खूब गन्दी बातें भी करतें है और खूब गालियाँ भी निकालते हैं।
ऐसे ही एक दिन मैंने एक ब्लू फिल्म चलाई थी और मैं माधुरी को अपने लौड़े पर बिठा कर फिल्म दिखा रहा था। फिल्म में दो काले आदमी अपने मोटे मोटे लौड़ों से एक लड़की को चोद रहे थे।
मैंने कहा- माधुरी, अगर तू इस लड़की की जगह होती तो कैसा लगता तुझे?
माधुरी के मुंह से सिसकारी निकल गई और वो मेरे लौड़े पर कूदने लगी।
मैंने फिर कहा- माधुरी, तूने जवाब नहीं दिया?
माधुरी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, माधुरी ने कहा- बहन के लौड़े ! मेरी किस्मत में सिर्फ तेरा ही लौड़ा लिखा है ! और वो मुझे मिल रहा है ! ऐसे दो काले नाग मेरी किस्मत में कहाँ?
मुझे माधुरी की बातों में मजा आने लगा, माधुरी को भी सेक्स का नशा होने लगा।
मैंने कहा- डार्लिंग, तू फ़िक्र मत कर ! मैं तुझे एक बढ़िया काला लौड़ा दिलवा दूंगा ! तू सिर्फ बता दे मुझे कि किससे चुदना है तुझे?
माधुरी ने कहा- मुझे क्या पता? तू ही चुदवा दे किसी मर्द से !
मैंने कहा- मेरा वो दोस्त है न बिल्लू ! वो कैसा रहेगा?
वैसे तो बिल्लू का असली नाम विनोद है पर सभी उसे बिल्लू ही कहते हैं।
माधुरी की आँखें ख़ुशी से चमक उठी क्योंकि बिल्लू एक सेक्सी आदमी था पूरे छह फ़ुट का और मुझ से लगभग दो गुना होगा उसका शरीर ! और उसका लौड़ा तो कयामत था, एक-दो बार तो मैंने भी उसका लौड़ा चूसा था।
माधुरी ने कहा- सच में? प्लीज मुझे बिल्लू से चुदवा दो ना !
मैंने भी एक शर्त रखी- तुम खुद बिल्लू को अपने जाल में फंसाना और इसके लिए मैं तुम्हें पूरी छूट दूँगा !
अगले ही दिन मैंने बिल्लू को घर पर बुला लिया- आज पेग-शेग लगायेंगे !
मैंने रास्ते में ही बिल्लू को कह दिया था कि माधुरी का तुझसे चुदने का बड़ा मन है।
बिल्लू तो वैसे भी कब से माधुरी को देख कर मुठ मारता था इसलिए वो तुरन्त राजी हो गया। पर मैंने उसे पहल करने से मना कर दिया था।
शाम को जैसे ही मैं और बिल्लू घर पहुंचे तो माधुरी के तो जैसे पैरों में घुंघरू बंध गये हों !
एक दूसरे को हेलो बोलने क बाद हम ड्राइंग रूम में बैठ कर बातें करने लगे।
अब आगे की कहानी, हम तीनों की जुबानी :
कमरे में हम तीनों थे मगर माधुरी और बिल्लू एक दूसरे को ऐसे देख रहे थे जैसे वहाँ सिर्फ वो दोनों ही हों।
बिल्लू: अरे माधुरी, हमें कुछ खिला-पिला भी दो !
माधुरी : हाँ हाँ ! बोलो, क्या लोगे चाय या कॉफी?
बिल्लू : अरे नहीं ! आज तो दारू पिला दो !
माधुरी : अभी लाई !
माधुरी कुछ पकौड़े, नमकीन तीन गिलास और शराब की बोतल जो मैं पहले ही ले आया था, ले आई।
दो दो पेग हम तीनों ने लिए और मस्त मूड सेट हो गया।
माधुरी और बिल्लू एक दूसरे को काफी देर से देख रहे थे, मुझे पता था कि आज मेरी घरवाली रांड बन कर चुदने वाली है, मेरा लौड़ा मस्त हो रहा था और शायद बिल्लू का भी।
तभी अचानक बिजली चली गई, कमरे में अँधेरा हो गया।
कुछ देर तक खामोशी के बाद मुझे कुछ आवाज सुनाई दी जैसे कोई पानी पी रहा हो। दो तीन मिनट बाद बिजली आई तो मेरी आँखों के सामने का नजारा बड़ा सेक्सी था :
माधुरी बिल्कुल नंगी थी और बिल्लू सिर्फ कच्छे में !
दोनों नीचे लेटे हुए थे और एक दूसरे को चूम रहे थे।
मुझे देख कर माधुरी ने उठने का नाटक किया तो बिल्लू ने उसे अपनी तरफ खींचते हुए कहा- अरे इस गांडू से क्यों डरती है? आ जा मेरी रंडी ! यह बहन का लौड़ा तो खुद मेरा ही लौड़ा चूसता था। माधुरी ने कहा- क्यों रणदीप? साले ! कमीने ! मादरचोद ! इतना स्वादिष्ट लण्ड सिर्फ अकेले ही पी गया बहन के लौड़े? अब तो मैं बिल्लू से और तुझसे जी भर के चुदूँगी ! क्यों बिल्लू?
बिल्लू- वाह मेरी रंडी तू तो बड़ी सेक्सी है !
बिल्लू ने अपना लण्ड कच्छे से निकाला तो माधुरी देखती ही रह गई।
दस इंच का मस्त काला लोला !
माधुरी- क्या मस्त लौड़ा है तेरा ! ए मेरे बिल्लू !
बिल्लू- तेरा ही है आज से यह कला नाग !
मैं भी अब तक नंगा हो चुका था और माधुरी के पीछे से उसे चूम रहा था और आगे से बिल्लू उसे मसल रहा था।
तभी माधुरी नीचे बैठ कर बिल्लू का लौड़ा चूसने लगी, बिल्लू ने उसे उठा कर सोफे पर लिटा लिया और उसके होंट पीने लागा।
माधुरी बिल्लू के सामने मस्त हो गई थी।
बिल्लू- बहनचोद रणदीप, तू मेरा लौड़ा चूस ! तब तक मैं माधुरी के होंट पी लूँ !
मैं बिल्लू का लौड़ा चूसने लगा मगर माधुरी पूरी रंडी बन चुकी थी और उसने बिल्लू को बड़े सेक्सी अंदाज में कहा- मेरे लौड़े राजा ! तेरे लौड़े को सिर्फ मैं चुसूँगी ! हटा इस मादरचोद को अपने लौड़े से !
बिल्लू ने मुझे हटा कर लौड़ा माधुरी के मुंह में ठूंस दिया और मैं माधुरी की फुद्दी चाटने लगा मगर माधुरी ने मुझे वहाँ से हटा दिया और कहा- इस फुद्दी को अब सिर्फ बिल्लू जी ही चाटेंगे !
और अपनी फुद्दी बिल्लू के मुंह पर रख दी।
अब मुझे माधुरी ने अपनी ब्लू फिल्म बनाने को कहा और मैं अपने हैन्डीकैम से उन दोनों की फिल्म बनाने लगा।
बिल्लू पूरे जोश से माधुरी की फुद्दी चाट रहा था तो माधुरी जल्दी ही झर गई और सोफे पर सीधी लेट गई।
बिल्लू ने अपने दस इंच के लौड़े को तीन झटको में माधुरी की फुद्दी में पूरा उतार दिया।
धीरे-धीरे गति बढ़ने लगी, माधुरी अपनी आँखें बंद करके चुद रही थी।बिल्लू ने उसे पूरी रात में पाञ्च बार ठोका।
माधुरी ने बिल्लू को कुछ दिन के लिए घर पर ही रख लिया।
एक दिन बिल्लू अपने भाई वीरू को भी ले आया देखने में बिल्कुल बिल्लू जैसा ही था और तब माधुरी अवस्था बदल बदल कर दोनों से चुदी।
माधुरी ने मेरा भी काम बना दिया है। माधुरी ने एक कामवाली को रख लिया है जो रोज मुझसे चुदती है।
मेरी कहानी आपको कैसी लगी दोस्तो? जरूर बताना...
और अगर आप भी मेरी माधुरी के साथ मजे करना चाहते हैं तो उससे बात करके देखें ! माधुरी कहती है कि :
कौन कहता है कि योनि औरत का सबसे कामोत्तेजक क्षेत्र है? मेरा नाम माधुरी है, और मैं अपने मुख से सबसे ज्यादा काम लेती हूँ ! ज़रा अपनी पैंट नीचे करो, मुझे एक नज़र देखने दो !
अगर मैंने इसे छू लिया तो यह जाग जाएगा और मैं इसे धीरे से चूम लूंगी- अम्मऽऽ आ ! इस तरह !
तब मैं इसे चूसना चाहूंगी- ऊम्मऽऽच उम्हं ! इस तरह से !
और जब मैं इसके सुपारे पर अपनी जीभ फ़िराऊंगी तो उस समय तक एक लिंग-रस की एक छोटी सी बूंद टपक पड़ेगी। और जब अपनी लार से भीगे आपके लौड़े को पूरा अपने मुँह में लूंगी तो शायद यह मेरे गले में ही फ़ंस जाए।
जब मेरी उंगलियाँ आपकी गोलियों पर फ़िरेंगी तो शायद इतनी उत्तेजना आप सहन ही ना कर पाएँ। मेरे चेहरे पर आपका रस फ़ैलेगा तो मेरे मुख से निकल पड़ेगा- देखो ! आपने यह क्या किया?
मज़ा आ रहा है? तुरंत मुझे फ़ोन करें !
मेरा यानि माधुरी का फ़ोन नम्बर यहाँ है।
prakashkuk1234@yahoo.com

जब दोनों की सील टूटी

,
मेरे प्रिय दोस्तो,
सभी सिसकती चूतों और तड़पते लंडों को राज के खड़े लंड का सलाम !
मेरी पहली कहानी
जा क्यों नहीं रहा है ?
प्रकाशित होने के बाद जो प्रतिक्रिया मिली, उससे लगता है कि मुझे अपने बाकी अनुभव भी आपके साथ बांटने चाहिए।
इसलिए हाज़िर हूँ एक और कहानी के साथ !
बात तब की है जब मैं बारहवीं की परीक्षा देकर छुट्टियों में मेरे बड़े भाई की ससुराल गया। वहाँ पर भाई के दो साले और एक साली जो मेरे हमउम्र थे, से मेरी अच्छी पटने लगी। मैं पढ़ाई में काफी तेज़ हूँ इसलिए सब लोग मुझसे कुछ न कुछ पूछते रहते थे।
एक दिन भाई की साली, जिसका नाम माया है, ने मुझसे कहा- राज मुझे भी थोड़ा पढ़ा दिया करो तो मैं भी मेरी क्लास में आगे रहूँगी।
मैंने कहा- ठीक है और अगले दिन से हमने पढ़ाई शुरू कर दी।
मैं आपको बता दूँ कि मैंने इससे पहले मुठ तो बहुत मारी थी लेकिन चूत को तब तक पास से भी नहीं देखा था। माया को मैं पहले चोदना चाहता था। वो जब भी अपनी गांड मटकाती हुई मेरे सामने से निकलती थी तो मेरा लंड उसे सलामी देने लगता था। 32-28-34 की मस्त फिगर थी उसकी। उसके वक्ष तब 'सी' आकार के रहे होंगे।
दो चार दिन में ही मुझे पता चल गया कि वो भी मुझमें रूचि ले रही है तो मैंने भी उसे इधर उधर से छूना शुरू कर दिया।
फिर उसकी तरफ से कोई विरोध न देखकर मेरी हिम्मत बढ़ गई, अब मैं कभी उसके वक्ष को, कभी कमर को और कभी उसके चूतड़ों को कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ने लगा।
फिर एक दिन मैंने उससे पूछा- कभी चुदाई कराई है किसी से?
उसने ना में जवाब दिया तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा, मैंने सोचा मज़े आयेंगे जब उसकी चुदाई होगी। उसकी चूत भी सील पैक है और मेरे लंड का भी यही हाल है। हम मौके की तलाश में थे और मौका मिला हमें दो दिन बाद जब सभी घरवाले एक रिश्तेदार के घर शादी में गए वो भी तीन दिन के लिए। हमें तो समझो मुँह मांगी मुराद मिल गई।
बहुत इंतजार करने के बाद रात आई, पूरे घर में वो, मैं और उसकी भाभी ही बचे थे। रात के करीब ग्यारह बजे होंगे। हमारा कार्यक्रम पहले ही पक्का था।
दिन में मैं दूर की दुकान से कंडोम खरीद लाया था। दरवाज़े पर आहट होते ही मैं खड़ा हुआ, देखा कि माया खड़ी है। मैंने उसे अन्दर खींचकर दरवाज़ा बंद कर दिया और उसको देखता रहा। सफ़ेद सूट में वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी।
मुझे ऐसे देखा तो वो बोली- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- देख रहा हूँ कि आज तुम्हारी सील टूटने वाली है।
उसने कहा- मैं तो कब से सोच रही हूँ कि तुम मुझे प्यार करो।
मैंने कहा- आज तो देखती जाओ, मैं क्या क्या करता हूँ तुम्हारे साथ !
फिर शुरू हुआ हमारा चुदाई का खेल, मैं इतना उत्तेजित था कि क्या बताऊँ। मेरा लंड पहले से ही तना हुआ था, मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किये, पहले कमीज़ और फिर सलवार। अब वो सिर्फ ब्रा-पैंटी में थी, मैं अभी जिस हाल में उसे देख रहा था इतना भी पहले किसी लड़की को नहीं देखा था। तब मुझे लगा कि लड़की कितनी सेक्सी चीज़ होती है, इसके रोम रोम में सेक्स भरा होता है।
मैंने उसे पकड़कर ज़ोरदार चुम्बन लिया और उसे अपनी बाहों में समेट लिया।
मैंने कहा- माया अब तुम मेरे कपड़े उतारो !
उसने एक-एक करके मेरे पैंट, शर्ट और बनियान उतार दिए, अब मैं अंडरवीयर में था और वो ब्रा-पैंटी में। मैंने ब्रा के उपर से ही उसके वक्ष को दबाया तो वो अपने आप में सिमटने लगी। मुझे अपने आप पर यकीन नहीं हो रहा था कि मैं एक लड़की को बिना कपड़ों के देख रहा हूँ और वो भी उस हालत में जब वो मुझसे ही चुदने के लिए तैयार हो। फिर मैंने उसके ब्रा और पैंटी भी उतार दिए। क्या चूत थी वो, हल्के सुनहरे रोयें आने शुरू ही हुए थे। आज भी उस चूत को याद करता हूँ तो पानी निकले बिना नहीं रहा जाता।
हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। उसने मेरा लंड देखकर आँखें बंद कर ली, पर मैं कहाँ मानने वाला था।
मैं बैड पर आ गया और उसे चूमना शुरू किया। उसके होठों पर, उसके गर्दन पर, गर्दन के पीछे और फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर आता गया, हम दोनों का ही पहला अनुभव था इसलिए सब कुछ नया-नया सा लग रहा था। मैं उसके चूचे दबाता जा रहा था और साथ ही चुचूक भी रगड़ रहा था, वो बस आँखें बंद करके सिसकारियाँ ले रही थी। मैं उसके सारे बदन को चूम रहा था। उसके गालों से उसकी जांघों तक फिर चूत पर आकर एक गहरा चुम्बन लिया तो वो चिहुंक उठी और उसने मेरा लंड पकड़ लिया और कहा- राज अब करो भी। डाल दो इसको अंदर। अब नहीं रहा जाता।
मैं समझ गया कि सही वक़्त है अब रुकना ठीक नहीं।
मैंने उसकी टांगें फैलाकर चौड़ी कर दी, चूत का छेद साफ दिखाई देने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे गुलाब की पंखुड़ी के बीच में किसी तितली ने थोड़ा सा चाटकर छेद बना लिया हो। छोटा सा छेद देखकर मुझे भी लगा कि इसमें इतना बड़ा लंड कैसे जायेगा।
लेकिन जो होना था उसको कौन रोक सकता है। मैंने ड्रेसिंग टेबल से कोल्ड क्रीम उठाई और बहुत सारी निकालकर उसकी चूत और अपने लंड पर लगा ली, जिससे लंड आसानी से चूत में चला जाये, लंड को पकड़कर उसकी छोटी सी चूत के मुँह पर रख दिया और एक जोर का धक्का दिया। लंड का केवल अग्र भाग ही चूत के अन्दर गया होगा, लेकिन वो दर्द से छटपटा उठी और चिल्लाने लगी।
मैं डर गया कि कहीं भाभी न जाग जाये, फिर मैंने लंड निकालकर उसे पूरे बदन पर चूमा और कहा- अगर ज्यादा दर्द है तो नहीं करते !
लेकिन मेरे प्यार और चूमने से शायद वो अपना दर्द भूल गई थी, तो बोली- नहीं राज, यह रात फिर पता नहीं कब आएगी। मैं सह लूंगी, तुम डालो इसको अंदर पर धीरे से डालना।
लेकिन मैं समझ रहा था कि इस बार अगर बीच में अटक गए तो मुश्किल हो जाएगी, इसलिए लंड और चूत पर क्रीम लगाकर अपने दोनों हाथ उसके फैले हुए घुटनों पर रखे और लंड को चूत के मुँह पर रखकर पूरी ताकत से जो झटका मारा तो लंड चूत की धज्जियाँ उड़ाता हुआ चूत की गहराई में अंदर तक उतर गया।
माया की आँखों से आंसू छलकने लगे लेकिन उसके होठों को मैंने अपने होठों से कस रखा था तो उसके मुँह आवाज़ न निकल सकी। तभी मैंने भी लंड में बहुत तेज़ दर्द महसूस किया। मुझे नहीं पता था कि दर्द क्यों हो रहा है। वो भी दर्द से बेचैन थी और मेरा भी बुरा हाल था। मैं सोच रहा था कि इतनी कसी चूत में पहली बार गया है शायद इसलिए हो रहा है, जबकि सच यह था कि मेरी भी सील तभी टूटी थी जब मैंने माया की सील तोड़ी।
मैं उसकी चूत में लंड डालकर 5 मिनट तक शांत पड़ा रहा और जब दर्द कम हुआ तो मैंने धक्के मारने शुरू किये। लंड चूत में इतनी बुरी तरह कसा हुआ था, लग रहा था जैसे किसी ने प्लास से पकड़ रखा हो लेकिन मज़ा भी उतना ही आ रहा था।
फिर धीरे-धीरे धक्के तेज़ हुए तो मज़ा भी ज्यादा आने लगा, उसे भी और मुझे भी।
मेरे होठों ने उसके होठों को कस रखा था, दोनों स्तन मेरे पंजों की गिरफ्त में थे और उसकी चूत ने मेरे लंड को कब्ज़े में ले रखा था। किसी की चुदाई करने का मेरा पहला अनुभव था यह। मैं धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था फिर वो भी नीचे से धक्के मारते हुए मेरा साथ देने लगी। मेरे साथ-साथ उसके धक्कों की गति भी बढ़ती ही जा रही थी। शायद वो झड़ने वाली थी लेकिन मुझे नहीं पता कि वो कैसे झड़ेगी और उसे कैसा लगेगा। मैं तो बस लंड को चूत में डालकर धक्के मार मार कर चूत का न जाने क्या बना देना चाहता था।
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद उसका बदन अकड़ने लगा और वो मुझसे चिपकने लगी। वो मुझे अपने आप में समेट लेना चाहती थी और मुझे चूमती ही जा रही थी। इधर मैं भी चुदाई के उस पड़ाव पर था जहाँ कोई भी चुदाई को बीच में नहीं रोक सकता। वो मुझे चूमती जा रही थी और मैं उसे चोदता जा रहा था।
अन्ततः मेरे लंड ने भी लावा उगल दिया उसकी चूत में। मेरा बदन लहराते हुए उसके ऊपर ढेर हो गया।
थोड़ी देर उसी हालत में हम लेटे रहे। मैंने उसे अपने ऊपर लेटा लिया लेकिन लंड अभी भी चूत में ही था। थोड़ी देर में मैंने लंड निकाला और हम दोनों बैड पर बैठ गए लेकिन बिस्तर देखकर हमारी हालत ख़राब हो गई। जितनी जगह में चुदाई हुई थी वो पूरी की पूरी खून से लाल हो चुकी थी। उसको चूत में दर्द हो रहा था। मैंने देखा मेरा लंड भी खून से सना था। ऊपर की चमड़ी हटाकर देखा तो पता चला की लण्ड के ऊपरी हिस्से में जहा छल्ला जैसा होता है वहाँ से लंड की खाल कट गई है। शायद लड़के की सील टूटना यही होता है।
लंड और चूत दोनों का ही बुरा हाल था, तो हमने रात में दोबारा कुछ नहीं किया। बस एक दूसरे से लिपट कर सो गए, लेकिन उसके बाद के तीन दिन मेरी ज़िन्दगी के सबसे हसीन दिन थे जब हमने सेक्स और जिंदगी का पूरा मज़ा लिया। याद नहीं उन तीन दिनों में कितनी बार चुदाई की होगी।
उसके बाद जब भी हम मिलते, हमारा चुदाई का कार्यक्रम बन ही जाता और हम अपने पुराने दिनों में खो जाते।
अब हम दोनों की अलग अलग शादी हो चुकी है और दोनों अपनी ज़िन्दगी से खुश हैं, लेकिन अब मौका नहीं मिलता वो सब करने का। अब कभी जब उसकी याद आती है तो मुठ मारकर खुद को और अपने लंड को तसल्ली देता हूँ ...
यह थी मेरी दूसरी कहानी। अपनी राय मुझे मेल करना, फिर अपना एक और अनुभव बांटने आऊँगा।
राजेश वर्मा
rv5988@gmail.com

पटियाले दा पटोला

,
अन्तर्वासना के सभी पढ़ने वालो को मेरा नमस्कार।
मेरा नाम विवेक है और मैं पंजाब के जालन्धर का रहने वाला हूँ। मेरी उमर 25 वर्ष है और लम्बाई 5 फ़ुट 5 इन्च है और भार 60 किलो है।
मैं अन्तर्वासना का बहुत बड़ा चाहवान हूँ। अन्तरवासना में आई हर कहानी मैंने पढ़ी है। मैं आप सब लोगो का शुक्रिया का करना चाहता हूँ कि आप सबने अपने हसीन पल हम सबके साथ बांटे। आप लोगो की तरह ही मैं भी अपने कुछ पल आप के साथ बाँटना चाहता हूँ।
दोस्तो, यह मेरी जिंदगी की सच्ची घटना है। साथ ही यह अन्तर्वासना पर मेरी पहली कहानी है।अपनी कहानी पेश करने से पहले मैं आप सब लोगो को "पटोला" शब्द का मतलब बताना चाह्ता हूँ। पटोला शब्द पंजाबी भाषा में बहुत सुंदर लड़की को कहते हैं। चालू भाषा में हम ऐसी लड़कियों को 'टोटा' या 'माल' या 'कट्टो' भी कहते हैं। अब ज्यादा समय ना लेते हुए मैं अपनी कहानी पेश करता हूँ।
दोस्तो, यह बात दो-तीन साल पहले की है जब मैं पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में पढ़ता था। मैं शुरू से ही सेक्स का भूखा रहा हूँ। जब भी किसी सुंदर लडकी को देखता था तो दिल करता था कि अभी इसे पकड़ कर चोद डालूँ। हमेशा से मैं किसी लड़की की तलाश में रहता था जो मेरे साथ सेक्स करने को तैयार हो जाए। मगर मुझे कभी ऐसी लड़की नहीं मिली थी। ना स्कूल में और ना कालेज में और मैं सेक्स के लिये बस तड़पता रहता था।
मगर एक दिन भगवान ने मेरी सुन ली।
हमारी यूनिवर्सिटी में हर छात्र के लिये इन्टरनेट की मुफ़्त सुविधा है जिसकी वजह से हर कोई इसका भरपूर फायदा लेता है। कोई गाने डाउनलोड करता था तो कोई फिल्में, कोई चैट करता था। मैं भी उन्हीं में से एक था। मगर मैं चैट इसलिए करता था कि शायद ऐसी कोई लड़की मिल जाये जो जिसे सेक्स करने का शौक हो और हम दोनों की जरूरत एक सी हो।
मगर कई कोशिशों के बाद भी मुझे ऐसी कोई लड़की नहीं मिली। और अब मैं चैट कर कर के बोर हो चुका था और अब तक मैंने चैट करना लगभग बंद कर दिया था। एक दिन मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था कि तभी मुझे एक ख्याल आया। मैंने सोचा कि क्यूँ ना सीधे इन्टरनेट पर सीधे खोज की जाये, शायद बात बन जाये।
और ऐसा सोचकर मैंने कई सारी डेटिंग वेबसाइटों पर अकाउंट बना कर खोज करना शुरू कर दिया। मैं ज्यादातर डेटिंग वेबसाइटों पर पंजाबी लड़कियाँ ही ढूंढता था और मैंने कई लड़कियों और महिलाओं को ईमेल भी भेजी मगर किसी का कोई जवाब नहीं आया।
एक बार ऐसे ही सर्च करते हुए मुझे पटियाला की एक लड़की का अकाउंट मिला जिसमें उसने अपना इमेल पता दे रखा था। मैंने तुरंत उस इमेल पर मेल भेजी और उसके जवाब का इंतज़ार करने लग पड़ा।
अगले दिन उसका जवाब आया जिसमें उसने लिखा था कि वो मेरी मित्र बनना चाहती है। और फिर उसने मुझसे मेरे बारे में काफी कुछ पूछा। मैंने उसे अपने बारे में सब कुछ बता दिया कि जैसे मैं क्या करता हूँ, कहाँ का रहने वाला हूँ और उसे मैंने अपनी एक फोटो भी भेज दी।
अगले दिन उसका जवाब आया जिसमें उसने अपना नाम सिमरन बताया, साथ ही उसने मुझे अपना मोबाइल नंबर भी दिया और उसे फोन करने को कहा।
मैंने रात दस बजे उसे फोन किया।
और दोस्तो, जैसे ही मैंने उसकी आवाज़ सुनी तो मज़ा आ गया। इतनी मीठी आवाज़ थी उसकी !
साथ मैं आपको यह भी बता दूँ कि वो दिखने में भी बहुत सुन्दर थी। खैर हम दोनों ने आपस में पंद्रह-बीस मिनट बात की। उसने बताया कि वह पटियाला के किसी सरकारी ऑफिस में नौकरी करती थी। उसकी उम्र उनतीस साल थी और वो एक तलाकशुदा थी।अगले दिन उसने मुझे फोन किया और अगले रविवार को मिलने के लिए कहा।
मैं मान गया और बेसब्री से रविवार का इन्तज़ार करने लगा। शनिवार को उसने मुझे फोन करके मिलने की जगह बताई जो एक रेस्तराँ था और अगले दिन मिलने के लिए ग्यारह बजे का समय दिया।
मैं अगले दिन दस बज कर तीस मिनट के लगभग उसके बताए रेस्तरां में पहुँच गया और इन्तज़ार करने लगा। लगभग ग्यारह बजे मेरे मोबाइल पर उसकी कॉल आई और उसने मुझसे पूछा कि मैं कहाँ हूँ और कहाँ बैठा हूँ।
मैंने उसे बताया। तभी मेरा ध्यान खिड़की के शीशे से बाहर गया और मैंने एक सिल्वर रंग की इंडिका कार रूकती देखी। एक मिनट बाद उसमें से एक बहुत ही सुंदर महिला निकली जिसने हल्के लाल रंग का पटियाला सूट पहना था। उसके बाल उसकी कमर के नीचे तक पहुँच रहे थे और उसने वो खुले छोड़े हुए थे। उसका बदन की आकृति भी बहुत मस्त थी लगभग 36-26-34 का होगा। उसके मम्मे बहुत ही प्यारे लग रहे थी।
मुझे लगा यह वही है ! फोटो में वो इतनी सुंदर नहीं लगती थी जितनी सुंदर सामने से लग रही थी।
अंदर आते ही वो मेरी तरफ आई और मुस्कुरा कर मुझसे पूछा- एक्सक्यूज़ मी ! क्या आप ही सूरज हैं?
मैंने कहा- हाँ मैं ही हूँ !
मेरा जवाब सुनकर वो पुनः मुस्कुरा दी और हाथ मिलाने के लिए मेरी तरफ बढ़ा दिया। मैंने भी उससे हाथ मिलाया। वो सच में बहुत सुंदर लड़की थी। आप सुब जानते ही होंगे की भारत में सुबसे सुंदर लड़कियाँ पंजाब की होती हैं और पटियाला, अमृतसर की लड़कियों के तो क्या कहने।
अगर आपको मेरी बात पर यकीन न हो तो खुद पंजाब आकर देख लें।
खैर, अब आगे की कहानी पेश करता हूँ।
हाथ मिलाने के बाद वो मेरे बिल्कुल सामने की कुर्सी पर बैठ गई, हमने कॉफी आर्डर की और हमने बातें शुरू कर दी। बातों बातों में उसने मुझे बताया कि उसकी एक साल पहले ही शादी हुई थी और उसका पति इंग्लैंड में काम करता था। उसकी शादी उसके माता-पिता ने की थी और शादी के चार दिन बाद ही उसके पति को वापिस जाना पड़ गया था। मगर शादी के कुछ दिन बाद पता चला कि उसके पति ने इंग्लैंड में एक और शादी की हुई है। जब यह बात यहाँ पता चली तो उसने और उसके घर वालों ने तलाक लेने फैसला किया और शादी के एक साल बाद उसने अपने पति से तलाक ले लिया।
और तब से वो अपने घर में अकेले रहती है। उसके माँ बाप अपने पुराने घर में रहते थे जो शहर से दूर एक गाँव में था और उनकी काफ़ी खेतीबाड़ी है। वो शहर में नौकरी करती थी इसलिए वो यहाँ रहती थी और नौकरी सिर्फ अपने समय बिताने के लिए करती थी। महीने में एक बार अपने माँ बाप के पास जाती थी, ऐसा उसने मुझे बताया।
हमने वहाँ लंच किया और फिर उस दिन की मुलकात खत्म करके वापिस आ गए।
अगला पूरा हफ्ता हम फोन पर रोज बात करते रहे और बातों-बातों में उसने मुझे बता दिया कि उसे सेक्स की कितनी भूख है और उसके लिए कितना तड़प रही है...
उसने एक दिन मुझे बताया कि वो अपने ऑफिस से चार दिन की छुट्टी ले रही है, दो दिन वो अपने माँ बाप से मिलने जा रही है और दो दिन वो मेरे साथ अपने घर में बिताना चाहती है।
मैं तैयार हो गया और मुझे लगा कि अब मेरी सेक्स की भूख शांत होने वाली ही है।
वो बुधवार को छुट्टी लेकर अपने माँ बाप से मिलने चली गई और शुक्रवार शाम को उसने मुझे कॉल की- मैं वापिस आ गई हूँ और मैं शाम को आपको लेने आऊँगी।
मैंने हाँ कर दी।
दोस्तो, आपको मैं बता दूँ कि यूनिवर्सिटी में शनिवार को छुट्टी होती थी।
खैर शाम को करीब सात बजे उसने मुझे फोन किया- मैं यूनिवर्सिटी के बाहर आ गई हूँ और आपका इन्तजार कर रही हूँ।
मैं भी जल्दी से तैयार होकर यूनिवर्सिटी के बाहर पहुँचा। पिछले दिन मैंने उसके लिए चॉकलेट का गिफ्ट पैक खरीद लिया था और साथ में कन्डोम के दो पैकेट भी।
बाहर आकर मैं उसकी कार की तरफ गया और दरवाज़ा खोलकर अंदर सीट पर बैठ गया, उससे हाथ मिलाया, उसका हालचाल पूछा और उसे गिफ्ट दिया जिससे वो बहुत खुश हुई।
अब हम उसके घर की तरफ चल पड़े। करीब तीस मिनट के बाद हम उसे घर पहुँच गए। उसने मुझे कहा कि मैं जल्दी से घर खोलती हूँ, आप जल्दी से घर में चले जाना ताकि कोई आपको देख न ले। मैं उसकी बात समझ गया और वैसा ही किया जैसे उसने बताया था।
वो अपनी कार गैराज में पार्क करने चली गई और पांच मिनट बाद वो भी अंदर आ गई। अंदर आते ही वो मुझसे लिपट गई और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। मैं भी उसे चूमने लगा, उसके होंठ चूसने लगा और वो भी पूरी तरह से चुम्बन में मगन रही।
करीब दस मिनट तक हम चुम्बन करते रहे और फिर अलग हो गए। उसके बाद वो कॉफ़ी बनाने रसोई में चली गई और मैं उसका घर देखने लगा पड़ा। पाँच दस मिनट तक वो कॉफ़ी बनाकर ले आई आर साथ में नूडल्स भी।
हमने साथ बैठ कर काफी पी, नूडल्स खाए और फिर बातें करने लग पड़े। थोड़ी देर बाद उसने बाहर से खाना आर्डर कर दिया और वो मेरे साथ आकर बैठ गई।
उसने टीवी चला लिया, चैनल बदलते बदलते जैसे ही उसने स्टार मूवीज़ चैनल लगाया, तो उसमे देखा कि हीरो और हिरोइन एक दूसरे को चूम रहे थे और सेक्स कर रहे थे।
उसने यह सब देखा और फिर मेरी तरफ ! और मुझसे कहा- सूरज, मैं बहुत प्यासी हूँ। प्लीज़ मेरी प्यास बुझा दो। बहुत तड़प रहीं हूँ।
मैंने उसे गले लगा लिया और कहा- मैं भी कब से प्यासा बैठा हुआ हूँ, तुम चिंता मत करो।
उसने मुझे यह भी बताया कि शादी के बाद उसके साथ केवल मुखमैथुन ही किया था और दो दिन बाद उसके पति को वापिस जाना पड़ गया था। इसका मतलब था की वो अभी तक बिलकुल नया माल थी और चुदी नहीं थी।
यह सुनते ही मैं बहुत खुश हो गया और भगवान को शुक्रिया करने लगा कि देर से ही सही, मगर जब दिया तो एकदम रापचिक माल दिया।
एक तो वो वैसे ही बहुत सुंदर थी और दूसरी तरफ अभी तक बिल्कुल कुंवारी थी, मैंने ही उसकी सील तोड़नी थी। मैं बहुत खुश हो गया।
इतनी में दरवाज़े पर किसी ने घण्टी बजाई, सिमरन ने देखा कि रेस्टोरेंट से लड़का खाना आया था।
हमने साथ बैठ कर खाना खाया और फिर वो मुझे लेकर बेडरूम में आ गई, मुझे कहा- आप थोड़ी देर बैठो, मैं ज़रा आती हूँ।
इतना कहकर वो चली गई और मैं वही बिस्तर पर लेट गया।
दस-पंद्रह मिनट बाद जब वो वापिस आई तो मैं उसे बस देखता रह गया। वो गुलाबी रंग की पारदर्शी नाईटी में मेरे सामने खड़ी थी जिसमें से उसके काले रंग की ब्रा और पैंटी बिल्कुल साफ़ नज़र आ रही थी। उसके मम्मे उसकी ब्रा फाड़ कर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। उसके शरीर दूध से भी ज्यादा गोरा था और उस पर कोई बाल नहीं था और गुलाबी रंग की नाईटी में वो बहुत मदहोश कर देने वाला लग रहा था।
उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। वो मेरे सामने आई और अपने बाल सुखाने लग पड़ी शीशे के सामने खड़े होकर। मगर दोस्तों मुझसे सब्र नहीं रहा और मैं जल्दी से बिस्तर से कूद कर उसके पीछे पहुँच गया और उसे पीछे से पकड़ कर गर्दन पर चुम्बन करने लग पड़ा, मेरे हाथ उसके मम्मे सहलाने लग पड़े।
उसने थोड़ी सी आह उह ! की।
उसके बाद वो मेरी तरफ मुड़ी, अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और बहुत ही उत्तेजना से चूमने लग पड़ी। मेरे हाथ अब उसके मम्मों पर थे और उन्हें दबा रहे थे।
उसने अपना एक हाथ मेरे लंड पर रख दिया था और वो उसे सहला रही थी।
हम ऐसे ही चुम्बन करते करते बिस्तर पर आ गए और वही करते रहे। वो मेरे होंठ चूस रही थी और मैं उसके ! और बीच बीच में एक दूसरे के मुँह में अपनी जीभ भी डाल रहे थे।
करीब पन्द्रह बीस मिनट के बाद अलग हुए। अलग होकर वो मुझसे लिपट गई दोबारा और कहने लगी- आज मेरी प्यास जरूर बुझा देना। बहुत प्यासी हूँ मैं ! सोचा था कि शादी के बाद प्यास बुझ जायेगी मगर वो भी ना हुआ। आज तुम इसकी प्यास जरूर बुझा देना। तुम जो मांगोगे, मैं तुम्हें दूंगी।
ऐसा कह कर वो और जोर से मुझसे लिपट गई और मेरी गर्दन और सीने पर चुम्बन करने लग पड़ी मगर उसका हाथ अब भी मेरे हथियार को सहला रहा था और मुझे लग रहा था कि मेरा लंड पतलून फाड़ कर बाहर आ जायेगा।
अब मैंने उसे खुद से अलग किया और उसकी ब्रा उतार दी। ब्रा उतरते ही दो नर्म-नर्म गोरे-गोरे संतरे मेरे सामने आ गए।
दोस्तो मैं तो बस देखता ही रह गया। क्या मम्मे थे उसके !
मैंने एकएम से उसके दोनों संतरे पकड़ लिए और जोर जोर से मसलने लगा और वो धीरे आह आह करने लगी।
तभी मुझे एक विचार आया और मैंने उसे पूछा- क्या घर में शहद है?
वो शहद लाई तो मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी पैंटी भी उतार दी।
दोस्तो, पैंटी उतरते ही जो नजारा मेरे सामने आया मैं उसका बता नहीं सकता। उसकी फुद्दी पर कोई भी बाल नहीं था, उसकी फुद्दी भी बहुत गोरी थी। मुझे ही पता है कि मैंने कैसे खुद पर काबू रखा।
तब वो बिस्तर पर लेट गई और मैं शहद उसकी पूरे शरीर पर लगाने लगा और मालिश करने लग पड़ा। इससे उसे बहुत ही मज़ा आ रहा था। जब कभी मेरा हाथ उसकी फुद्दी पर छू जाता, वो सिसक जाती थी।
थोड़ी देर मालिश करने के बाद मैं उसको दोबारा चूमने लग पड़ा, मेरे हाथ उसके मम्मे दबा रहे थे जिससे उसे मज़ा आ रहा था और वो और जोर से दबाने को कहने लगी थी। चुम्बन करते करते मैं उसके मम्मों तक पहुँचा और उसके एक मम्मे को चूसने लग पड़ा, हाथ से उसका दूसरा मम्मा दबाने लगा और दूसरे हाथ से उसकी फुद्दी सहलाने लगा।
उसने भी अब अपना हाथ मेरी पैंट में डाल दिया था और अंदर ही अंदर लंड को दबा रही थी। बारी बारी से मैंने उसके दोनों मम्मे चूसे। शहद की वजह से मीठा मीठा स्वाद आ रहा था जिससे मुझे बहुत मज़ा आया।
चूसते चूसते मैं बीच बीच में उसे ह्ल्के से काट लेता था जिससे वो हल्की से सिसकारी भर उठती थी। अब मैं उसे चूमता हुआ और जीभ घुमाता हुआ उसके पेट तक पहुँचा और जीभ घुमाने लगा जिससे उसे गुदगुदी हो रही थी। लेकिन जैसे ही मैं उसकी फुद्दी की तरफ जाने लगा तो उसने मुझे रोक दिया और एकदम मेरी पतलून उतार दी, मेरा लंड अंडरवियर से बाहर निकाल लिया और जल्दी से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और साथ में चमड़ी को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया।
मैं बता नहीं सकता कि कितना मज़ा आ रहा था, मगर वो बहुत तेज तेज चूस रही थी और मेरा पहली बार होने की वजह से मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था तो मैंने उसे धीरे चूसने को कहा और वो मान गई।
करीब दस मिनट की चुसाई के बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ और मैंने उसे बताया।
मगर वो थी कि लंड छोड़ने को तैयार ही नहीं थी, बस चूसे जा रही थी। फिर एकदम मैं उसके मुँह में ही झड़ गया और वो मेरा सारा माल निगल गई और चूस चूस कर मेरा लंड साफ़ कर दिया।
लंड चुसाई के वक्त मैं उसके मम्मों से खेल रहा था। अब मैंने उसे फिर से लेटा दिया और खुद उसकी टांगों के बीच में पहुँच गया और चूमने लगा और चूमता हुआ उसकी फुद्दी तक पहुँच गया।
जैसे कि मैंने बताया कि उसकी फुद्दी और आसपास कोई बाल नहीं थे और उसकी फुद्दी बहुत ही गोरी थी। दिल कर रहा था कि अभी खा जाऊँ।
मैंने उसकी टांगें फैला दी और उसकी फुद्दी पर पहुँच गया। उसकी फुद्दी की बहुत ही मादकता भरी खुशबू थी। मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी फुद्दी की दोनों फ़ांकों को अलग किया जिससे मुझे उसका छेद और लाल रंग का दाना दिख गया और अब मैंने बिना समय खोए अपनी जीभ उसकी फुद्दी में डाल दी और चाटना शुरू कर दिया।
मेरे ऐसे करते ही वो मचल उठी और सी...... सी... उऊम उऊम की आवाजें निकलने लग पड़ी।
मैं एक हाथ से उसकी फुदी का दाना भी रगड़ रहा था, वो मेरे सिर के बालों में हाथ फेर रही थी और बीच बीच में कह रही थी- और जोर से करो, आःह्ह अआह ! प्लीज़ और जोर से ! छोड़ना मत... और जोर से करो !
और मेरा सिर दबाए जा रही थी, अपनी कमर उठा रही थी...
थोड़ी देर ऐसे चाटने के बाद मैं रुका और अब मैंने अपनी ऊँगली में थूक लगा कर उसकी फ़ुद्दी में डाल कर अंदर-बाहर करने लगा और जीभ से उसके दाने की जोर जोर से चाटने लगा।मेरे ऐसा करते ही वो जैसे पागल ही हो गई और और जोर से अआआह्हह्हहह्ह, आह्हाआआअह्ह्ह्ह। आआआह्ह्ह्ह्ह्ह...। करने लग पड़ी और उसकी आवाज़ कांपने लगी।
करीब पाँच मिनट ऐसा करने के बाद उसका शरीर अकड़ने लगा और उसकी फुद्दी ने बहुत तेज़ी से पानी छोड़ दिया। मैं अभी भी उसकी फुद्दी चाट रहा था। जैसा कि मैंने बताया कि मैंने उसके पूरे शरीर पर शहद से मालिश की थी, उसकी फुद्दी का रस और शहद आपस में मिलकर एक अजीब सा स्वाद पैदा कर रहे थे मगर मैं भी सारा का सारा मीठा रस चाट गया।
अब मैं और वो एक दूसरे की बाहों में लेट गए और वो मुझे बहुत जोर से अपने गले लगा कर चूमने लग पड़ी।
दोस्तों इस पूरे काम में हमें करीब दो घंटे लग गए थे और यह सब करने के बाद हम वैसे ही लेटे रहे और पता नहीं कब हमारी आँख लग गई।
जब हमारी आँख लगी तब रात के लगभग बारह बज रहे थे। रात को जब मेरी आँख खुली तो मैंने महसूस किया कि सिमरन मेरा लंड फिर से चूस रही थी और मेरा लंड फिर से खड़ा हो चुका था, बिल्कुल तन गया था।
सिमरन पागलों की तरह उसे चूसे जा रही थी और एक हाथ से अपनी फुदी रगड़ रही थी। थोड़ी देर चूस कर वो बोली- अब रहा नहीं जाता ! प्लीज़ अब मेरी प्यास बुझा दो। अब नहीं रहा जाता, प्लीईइज़।
मैंने भी कहा- ठीक है !
तब उसे बेड पर लिटा दिया और उसकी टाँगें फैला दी। मैंने उसकी फुद्दी की फांकों को अलग करके देखा तो उसकी फुद्दी पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने अपना लंड उसकी फुद्दी के छेद पर टिका दिया और दबाव डालने लगा। मैंने अब पहला झटका दिया तो मेरा लण्ड फिसल गया। उसकी फुद्दी सच में बहुत तंग थी, बिल्कुल कुंवारी चूत थी उसकी। मैं मन में बहुत खुश था कि पहली बार में बिल्कुल कुंवारी फुदी का मज़ा चखने को मिला है।
मैंने फिर से अपना लंड उसके छेद पर टिकाया और फिर से झटका दिया। इस बार सुपारा अंदर चला गया और सिमरन दर्द के मारे चीख पड़ी। मैंने उसके मुँह पर हाथ रखा और और एक और झटका दिया। फुद्दी बहुत ही कसी होने से इस बार लंड आधा ही उसकी फुदी में गया और मैंने देखा कि सिमरन की आंखों में आंसू आ चुके थे।
मैंने जैसे ही उसके मुँह हाथ हटाया तो वो बुरी तरह चीखी और कहने लगी- प्लीज़ निकालो इसे बाहर। मैं मर जाउंगी। बहुत दर्द हो रहा है। प्ल्ज्ज़ निकालो इसे बाहर......प्लीज़।
वो अभी इतना कह ही रही थी कि मैंने उसे होठों पर अपने होंठ कस दिए और तीसरा झटका दिया और लण्ड उसकी फुद्दी की गहराइयों में पूरी तरह से उतर गया।
अब उसकी आंखें बुरी तरह से खुल गई और वो मुझे हटाने लगी। पर मेरे होंठ उसके होठों पर कसे हुए थे और मैंने उसे पकड़ा हुआ था। मेरा लंड उसकी फ़ुद्दी में ही था और वो अपने मुँह से बुरी तरह हून्हुहूँ ... म्म्म्म्म्म आआआआ कर रही थी और रो रही थी।
करीब दो मिनट बाद मैंने अपनी पकड़ ढीली की तो वो बोली- प्लीज़ निकाल लो बाहर।
मैंने अब उसकी बात मान ली और उसके ऊपर से हट गया।
जैसे ही मैं हटा, मैंने देखा कि उसकी फुद्दी से बहुत खून निकल रहा था और बेडशीट पूरी लाल हो चुकी थी। उसकी झिल्ली फट चुकी थी और अब वो कुँवारी नहीं रही थी। मैंने उसका कुंवारापन खत्म कर दिया था और मैं इस बात पर बहुत फख्र महसूस कर रहा था। उसे अभी भी दर्द हो रहा था। मैंने उसे कहा कि बाकी सब कल करेंगे मगर उसने कल की बजाए तभी करने को ही कहा।
उसे थोड़ा दर्द हो रहा था मगर फिर भी वो काम पूरा करना चाहती थी।
पहली बार करने की वजह से लंड की चमड़ी छिल गई थी और मुझे भी दर्द हो रहा था और मैं हैरान था कि लड़कियों को चुदाई का कितना शौक होता है कि इतने दर्द के बाद भी तैयार हो गई है चुदवाने के लिए।
मैं भी अब तैयार था। उसने मेरा लंड दोबारा चाट कर खड़ा किया और उस पर कन्डोम चढ़ा दिया। मैंने उसकी टाँगें दोबारा फैला दी, लंड उसकी फुद्दी के छेद पर रख दिया और दबाव डालने लगा।
इस बार लंड आराम से उसकी फुद्दी में चला गया और सिमरन को भी ज्यादा तकलीफ नहीं हुई।
जैसे जैसे लंड अंदर जाता था वो आह्ह्ह्ह्ह.. स्स्सीईई की हल्के से आवाज़ निकाल रही थी और धीरे-धीरे मेरा लंड उसकी फुद्दी में पूरी तरह उतर चुका था। अब मैंने धीरे धीरे उसे झटके देना शुरू किये। और वो अपने मुँह से उम्म्म आःह्ह स्सीईई उम्म्माम्म्मुम्म्म की आवाजें निकाल रही थी। धीरे मैं अपने झटके मारने की रफ़्तार बढ़ा दी।अब उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी कमर हिला हिला कर मेरा साथ देने लगी और बोले जा रही थी- और जोर से करो... फाड़ दो... निकल दो पूरी गर्मी मेरी चूत की। बहुत तड़पाती है ये...।
और पता नही न क्या क्या बोली जा रही थी।
मैं उसकी हर बात अनसुना करके बस उसे झटके पर झटके दिए जा रहा था। करीब पन्द्रह मिनट के बाद उसका शरीर अकड़ने लगा और उसने और जोर से मेरे इर्दगिर्द टांगें कस ली और मुझे पता चल गया कि वो झड़ने वाली है।
मैंने अपनी झटके मारने की रफ़्तार और बढ़ा दी और जोर जोर से झटके मारने लगा। करीब एक मिनट में उसने जोर से चीख मारी और वो झड़ गई। मगर मैं अभी तक नहीं झड़ा था तो मैंने झटके मारने जारी रखे और सारा बेडरूम हमारी चुदाई की आवाज़ से गूँज रहा था... पच्च्च्च्च् च्च्च्च्छ् च्च्छ्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्च्च्छ्ह पच पच की आवाजें गूंज रही थी।
करीब 5-6 मिनट के बाद मैं भी उसकी फुद्दी में झड़ गया। मैंने उसे चूमा किया और उससे अलग हो गया।
मैंने लंड पर से कन्डोम उतार दिया और उसने फिर से मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चाट कर पूरी तरह से साफ़ कर दिया। तब वो और मैं आपस में लिपट के सो गए।
सुबह करीब दस बजे मेरी आँख खुली।
यह थी मेरी कहानी कि किस तरह मैंने पटियाला के कुँवारे पटोले को चोद कर उसकी और अपनी प्यास शांत की। मैं उसके साथ दो दिन रहा और उसने दो दिन में करीब दस या बारह बार चुदाई के मजे लिए।
रविवार की शाम को मुझे यूनिवर्सिटी वापिस आना था। चुदाई की वजह से उससे चला नहीं जा रहा था मगर वो फिर भी मुझे यूनिवर्सिटी तक छोड़ने आई और साथ में उसने मुझे दो गिफ्ट पैकेट भी दिए।
मैं उसे मना करता रहा मगर उसने कहा कि तुमने मुझे बहुत मज़ा दिया और उसके लिए मैं खुशी से तुम्हें कुछ दे रही हूँ। और आगे जब भी मुझे जरूरत होगी, मैं तुम्हें बुला लूंगी। तुम मुझे भूलना मत।
ऐसा कहकर वो वापिस चली गई और मैं भी अपने हॉस्टल आ गया।
जब मैंने गिफ्ट खोला तो उसमें से नोकिया एन-73 निकला और जब मैंने दूसरा पैक खोला तो उसमें 3 हजार निकले।
मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ और क्यूंकि भगवान ने तो छप्पड़ फाड़ कर दिया था। पटियाला का सुंदर पटोला, उसकी कुंवारी चूत और ये तोहफ़े।दोस्तो मैं एक साल पटियाला रहा और हर महीने दो बार वो मुझसे जरूर चुदवाती थी। उसने मुझे अपनी और सहेलियों के नंबर भी दिए। उनको भी मैंने खुल के चोदा। लेकिन मैं इस लड़की और उसकी पहली चुदाई को नहीं भूला।
फिर मैं पटियाला से वापिस अपने गाँव आ गया मगर उसके फोन मुझे आते रहे।
एक दो बार मैं जालंधर से भी मिलने गया और एक दिन उसने बताया कि उसके घर वालों ने उसका दोबारा रिश्ता किया है और इस बार वो लड़का उनकी रिश्तेदारों में से है जो ऑस्ट्रेलिया में है।
उसके बाद मैं एक बार फिर उससे मिला और उसकी खूब चुदाई की। इस बार आते समय उसने मुझे फिर एक तोहफ़ा दिया जिसमें दस हजार रूपये थे। उसके अगले महीने उसकी शादी हो गई और वो ऑस्ट्रेलिया चली गई। वो आज भी मुझे मेल करती है। तो दोस्तो, यह थी मेरी पहली कहानी। मुझे मेल जरूर करें और बताएं कि मेरी सच्ची कहानी कैसे लगी...।
juicelicker7920@rediffmail.com

मामा की साली

,
नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम अमित है, मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। बहुत दिनो से सोच रहा था कि अपनी भी कहानी आप लोगों के सामने प्रस्तुत करूँ पर हिम्मत नहीं कर पा रहा था। पर मेरे दोस्त के समझाने पर मैं अपनी कहानी आपके सामने रख रहा हूँ।
यह कहानी शुरू होती है मेरे मामा की शादी से !
उनकी एक साली है जो बहुत ही खूबसूरत है, उसका नाम है खुशबू ! दिखने में बहुत ही खूबसूरत है, उसका फिगर बड़ा ही गजब का है, उसके मम्में देखते ही मन करता है कि अभी पकड़ कर मसल डालूं ! पर क्या करूँ खुद पर काबू कर रखा था कि किसी को मालूम हो गया तो क्या होगा, मेरी बड़ी बदनामी होगी पर मुझे क्या मालूम था कि मैं जो उसके बारे में सोच रहा हूँ, वो भी मेरे बारे में वही सोचती है।
इस बात का मुझे तब मालूम हुआ जिस दिन मेरे मामा की शादी थी। उस दिन क्या हुआ कि घर में शादी का माहौल था, सभी मामा की शादी से बहुत खुश थे, वो इसलिये कि उनकी शादी बड़ी ही मुश्किल से हो रही थी।
तो क्या हुआ कि मामा की बारात घर से निकलकर शादी के पण्डाल में पहुँच गई थी। घर के सभी लोग वहाँ पहुँच गये थे। सब कुछ बड़ी ही धूमधाम से हो रहा थे, सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि मेरे मामा की साली मेरे पास आई अपनी कुछ सहेलियों के साथ और मेरे साथ मजाक करने लगी। पहले तो मैंने सब-कुछ हल्के में लिया पर जब कुछ ज्यादा ही होने लगा तो मैंने उसे देखा तो उसकी आँखों में एक चमक थी जैसे वो बरसों की प्यासी हो, जो मुझसे कुछ कहना चाहती हो।
तो बहरहाल सब ऐसे ही चलता रहा। एकाएक वो उठ कर जाने लगी, मैं उसे देखता रहा तो उसने आगे जाकर पीछे मुड़कर देखा और मुझे कुछ इशारा किया जैसे कि वो मुझे अपने पीछे बुला रही हो।
तो मैं उसके पीछे चल दिया, वो आगे आगे और मैं उसके पीछे-पीछे।
फ़िर वो एक कमरे में घुस गई, मैंने देखा कि वो मुझे बुला रही है उस कमरे में !
मैंने अपने चारों तरफ देखा कि कोई देख तो नहीं रहा है। फ़िर मैं उस कमरे में घुस गया। जैसे ही मैं कमरे में गया तो मैंने देखा कि उसने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया और मुझे बेतहाशा चूमने लगी। मैं इस तरह के हमले के लिये तैयार नहीं था।
फिर क्या था, मैं जिस चीज के लिये मचल रहा था वो चीज आज मुझे सामने से मिल रही थी तो मैं मना कैसे कर सकता था। वो मुझे बेतहाशा चूमे जा रही थी, मैं भी उसे चूमे जा रहा था कि मैंने महसूस किया कि उसके हाथ मेरे लिंग पर थे। फिर क्या था, इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई, मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया, फिर उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया।
फिर उसने मुझे पलंग पर गिरा दिया, मेरे ऊपर चढ़ गई और मुझे चूमने लगी। उसकी इन हरकतों से मेरा सोया हुआ लण्ड जाग ही चुका था। फिर मैंने उसे अपने नीचे गिरा लिया और उसके पूरे नंगे बदन को देखने लग गया।
यार, क्या बताऊँ, यार क्या क्यामत लग रही थी ! मैंने अपनी जिंदगी में पहली बार किसी लड़की को नंगी देखा था तो समझो मेरी क्या हालत हुई होगी।
फिर मैंने उसके नंगे बदन को चूमना शरू किया तो वो पूरी गर्म हो गई। फिर मैंने उसकी चूत पर अपना हाथ रखखा तो वो कहने लगी- अमित प्लीज अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दो !
मैंने उसकी चूत को चूमना शरू किया तो वो जल्दी ही झड़ गई पर अभी मेरा काम नहीं हुआ था। मैं उसके पैर चौड़े कर उनके बीच में आ गया, अपने लण्ड का सुपारा उसकी चूत पर रखा और धक्का दिया तो वा अन्दर नहीं गया। उसकी चूत बहुत ही कसी थी तो मैं समझ गया कि वो अभी कंवारी है।
मैंने उसका एक पैर अपने कंधे पर रखा और एक जोर का धक्का दिया। मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में था और वा दर्द के मारे चिल्ला रही थी, उसकी आंखों से आँसू बहने लगे थे। पर मैंने दूसरा जोरदार धक्का दिया तो मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में था। मैंने देखा तो उसकी चूत से खून निकल रहा था और वो दर्द के मारे कराह रही थी।
मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके मम्मे चूसने लगा, उसके होंठ चूमने लगा।
थोड़ी देर में उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए तो उसे मजा आने लगा और वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी- फाड़ डालो, चीर डालो मेरी चूत को !
तो मुझे जोश आ गया फिर मैंने उसे पूरे बीस मिनट तक चोदा, इस बीच वो तीन बार झर गई।
फिर हम दोनों नंगे ही लेटे रहे। फिर हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और बाहर आ गए।
हमें जब भी मौका मिला शादी में तो हमने अपनी शरीर की भूख को शांत किया।
अब जब भी वो मेरे मामा के घर पर आती है तो मुझे फोन कर देती है और मैं उसे वहाँ जाकर खूब चोदता हूँ।
आगे क्या हुआ जानने के लिये मुझे मेल करें कि आपको कहानी कैसी लगी।
amit2may47@rediffmail.com

कोटा की डॉक्टर

,
मेरा नाम रिंकू है, मेरी उम्र २३ साल है, मैं कोटा राजस्थान का रहने वाला हूँ, मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ।
यह कहानी मेरी आपबीती है जिसे में अन्तर्वासना डाट कॉम के जरिये आप लोगों तक पहुँचा रहा हूँ।
मेरी चाची की डिलीवरी होनी थी, वो अस्पताल में भर्ती थी। मैं और मेरी मम्मी चाची के पास अस्पताल में थे।
शाम का समय था, मेरी मम्मी ने मुझे खाना लाने के लिए कहा। मैं होटल से खाना लेकर आ गया और हम खाना खाने में व्यस्त हो गए।
इतनी देर में एक नर्स अन्दर आई और बोली- आपको एक जरूरी फॉर्म भरना है, आपको डॉक्टर ने बुलाया है।
मेरी मम्मी ने मुझे डॉक्टर के पास जाने के लिए कहा।
जैसे ही मैं डॉक्टर के कमरे में गया तो सामने के लेडी डॉक्टर को देखकर मेरे तो होश उड़ गए ! क्या मस्त फिगर थी उसकी और उम्र लगभग 27 साल !
मैंने कहा- आपने बुलाया डॉक्टर?
उसने कहा- फॉर्म पर हस्ताक्षर के लिए बुलाया है।
मैंने कहा- क्यों? कैसा फ़ॉर्म है?
तो उसने मुझे समझाया- डिलीवरी के समय यदि कोई समस्या हो गई तो इसके जिम्मेदार हम नहीं है।
मैंने बिना कुछ सोचे साइन कर दिए और साथ ही मैंने पूछा- डिलीवरी में खर्चा कितना आ जाएगा?
उसने कहा- दस से बारह हजार !
मैंने कहा- जितना कम में हो जाये उतना बेहतर है !
उसने कहा- काम तो फ्री में भी हो जायेगा।
मैंने कहा- यह कैसे हो सकता है?
उसने कहा- हो सकता है ! लेकिन यह बात हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए।
मैंने कहा- ठीक है !
उसने मेरा मोबाइल नंबर माँगा तो मैंने अपना मोबाइल नंबर दे दिया।
डिलीवरी के बाद हम घर जा चुके थे, दो दिन बाद मेरे मोबाइल पर फ़ोन आया- मैं ईशा बोल रही हूँ !
मैं समझ चुका था कि यह उसी डॉक्टर का फ़ोन है।
उसने कहा- आज दिन में ठीक एक बजे मेरे घर पर आ जाना !
उसने अपना पता बताया और मैं ठीक एक बजे उसके घर चला गया।
उसने दरवाजा खोला तो मेरी तबीयत मस्त हो गई, वो बड़ी सेक्सी लग रही थी।
जैसे ही मैं घर के अन्दर गया तो देखा कि घर अन्दर से सजा हुआ था, मैंने कहा- यह क्या है?
तो वो बोली- आज मेरा जन्मदिन है !
मैंने उसे विश किया और काम पूछा तो उसने कहा- मैंने तुम्हारे साथ में जन्मदिन मनाना है !
मैंने कहा- आप मुझे पहले ही बता देती तो मैं आपके लिए उपहार ले आता !
उसने कहा- वो तो मैं अपनी पसंद से लूँगी !
मैंने कहा- आपको जो चाहिए वो मैं आपको देने के लिए तैयार हूँ !
मैंने पूछा- आपको क्या चाहिए?
तो उसने कहा- लण्ड !
सुन कर मैं चौंक गया, मैंने कहा- वो तो मेरे पास एक ही है ! वो मैं आपको कैसे दे सकता हूँ?
उसने कहा- नाटक मत करो और जल्दी तैयार हो जाओ !
मैं बहुत खुश था।
उसने कहा- अपने कपड़े उतारो !
मैंने अपने कपड़े उतार दिए, उसने मेरा खड़ा लण्ड हाथ में पकड़ा और कहा- आज से यह लण्ड और इस लण्ड का मालिक मेरे गुलाम है !
अचानक उसने मुझे गाल पर एक चांटा मारा और बोली- मादरचोद केक लेकर आ !
मैं नंगा ही केक लेने चला तो मैंने पूछा- केक है कहाँ?
उसने कहा- तेरी माँ की चूत में ! मादरचोद, फ्रिज में रखा है !
मैं केक लेकर आया और उसे मेज पर रख दिया। उसने अपना मोबाइल उठाया और कॉल किया। वो बोली- केक काटने का समय हो गया है, जल्दी आ जाओ !
तभी पीछे का एक दरवाज़ा खुला और एक साथ छः औरतें अन्दर आ गई जिनकी उम्र लगभग २५ से ३० साल की थी।
मुझे शर्म आ रही थी।
उनमें से एक बोली- ईशा, इंतजाम तो बहुत अच्छा किया है !
ईशा बोली चलो प्रोग्राम जल्दी शुरू करते हैं !
ईशा ने केक काटा और चाक़ू से केक मेरे लण्ड पर लगाकर लण्ड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
फिर ईशा ने मुझसे कहा- नयना को केक खिलाओ !
मैंने एक केक का टुकड़ा लिया और अपने लण्ड पर मसल दिया। अब मैं तो नयना को जानता नहीं था तो मैं उन छः में से एक औरत के पास गया तो उसने मुझे उल्टा किया और मेरे चूतडों पर दो चांटे रसीद कर दिए। तब मैं दूसरी के पास गया तो उसने भी वैसा ही किया। अब मैं तीसरी के पास गया तो उसने भी वैसा ही किया।
लेकिन में जैसे ही चौथी के पास गया तो उसने झट से मेरा लण्ड चाटकर साफ़ कर दिया और नयना अपने कपड़े उतारकर अलग बैठ गई।
इसी तरह से मैंने सबको बारी बारी से केक खिलाया और एक एक करके सब नंगी हो गई और मिलकर डांस करने लगी।
ईशा भी नंगी हो गई और सोफे पर लेट गई।
उसके बाद एक औरत बोली- आज ईशा का जन्मदिन है इसलिए आज सिर्फ ईशा ही चुदेगी और बाकी हम अपने अपने तरीके से मजे करेंगी!
इतने में ईशा ने ढेर सारा केक अपनी चूत में लगा लिया, मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रखा और चाटने लग गया, फिर अपना लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। उधर बाकी औरतें एक दूसरे की फ़ुद्दी में उंगलियाँ घुसा कर मजे दे रही थी।
अचानक से एक औरत मेरे पास आई और उसने अपना मुँह खोल लिया। मैंने अपना लण्ड चूत से निकालकर उसके मुँह में डाल दिया। इधर ईशा उल्टी लेट गई और केक की क्रीम को अपनी गांड में लगाने लगी। मैं सब समझ चुका था, मैंने लण्ड उसकी गाण्ड के छेद पर टिकाया और जोर से धक्का मारा।
एक ही बार में पूरा लण्ड अन्दर !
वो जोर से चिल्ला उठी। मुझे मजा आ रहा था, जैसे ही मैंने अपना लण्ड गाण्ड से निकाला तो फटाफट एक औरत ने अपने मुँह में लपक लिया और चूसने लगी। फिर उसने वापस लण्ड को ईशा की चूत पर टिका दिया तो मैंने धक्का मारा तो लण्ड सरकता हुआ चूत के अन्दर !
पन्द्रह मिनट बाद ईशा स्खलित हो चुकी थी।
मैंने भी जोर लगाकर अपना पूरा पानी चूत के अन्दर छोड़ दिया। थोड़ी देर बाद मैंने अपना लण्ड निकाला तो ईशा की चूत से नदी बह रही थी। उसकी सब सहेलियों ने उसकी चूत का पानी पिया और उसके बाद हम सब नंगे सोफे पर बैठ गए।
ईशा मुझसे बोलने लगी- ये सब मेरी सहेलियाँ हैं। आज इनकी चुदाई नहीं हुई है, अगली बार तुम्हें इन सबकी भी चुदाई करनी है।
मैंने पूछा- मैडम ये औरतें आपके पास कहाँ से आती हैं?
वो बोली- मैं एक लेडी डॉक्टर हूँ, इलाज के समय औरत की चूत और गाण्ड देखकर पता लगा लेती हूँ कि उसने कितनों का लण्ड खाया है। बस फिर उसे भी अपनी पार्टी में शामिल कर लेती हूँ फिर सबने मुझे एक एक हज़ार रुपए दिए और बोली- अब हम भी तुम्हें अपने घर बुलाकर चुदाई करवाएँगी।
इतने में ईशा बोली- कोटा की एक महिला है जो इलाज के लिए मेरे अस्पताल आई थी। उसके पति की कमजोरी के कारण उसके कोई संतान नहीं है, उसका नाम मीनाक्षी है और यह उसका मोबाइल नंबर है। तुम्हें उसके घर जाना है और उसके पेट में बच्चा डालना है। तुम पैसे की चिंता मत करना।
मैंने कहा- ठीक है !
इतने में ईशा की एक सहेली बोली- मेरी भी एक सहेली है जिसका बिना चुदाई के पेट नहीं भरता है, उसका नाम हिना है और यह उसका मोबाइल नंबर है, उसके घर जाकर उसकी भी अच्छे तरीके से चुदाई कर देना।
उस दिन के बाद कोटा, राजस्थान की बहुत सी महिलाएँ और लड़कियाँ मुझे अपने घर बुलाती हैं और तरह तरह से चुदाई करवाती हैं।
मुझे मेल करें !
rinkuverma520@gmail.com